मोहन भागवत का बड़ा बयान: सावरकर को भारत रत्न, UCC और संघ की विचारधारा पर खुलकर बोले

Sun 08-Feb-2026,05:42 PM IST +05:30

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मोहन भागवत का बड़ा बयान: सावरकर को भारत रत्न, UCC और संघ की विचारधारा पर खुलकर बोले RSS Chief Statement
  • मोहन भागवत ने वीर सावरकर को भारत रत्न देने का समर्थन किया.

  • भारत–अमेरिका व्यापार समझौते में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि बताया.

  • UCC और संघ प्रमुख पद पर जाति से ऊपर समरसता पर जोर.

Maharashtra / Mumbai :

Mumbai / राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपने विचार रखे। उनके बयान राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गए हैं। खासतौर पर वीर विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने को लेकर संघ प्रमुख की टिप्पणी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मोहन भागवत ने कहा कि यदि वीर सावरकर को भारत रत्न सम्मान दिया जाता है, तो इससे इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान की प्रतिष्ठा और भी बढ़ेगी। यह पहली बार है जब संघ प्रमुख ने सार्वजनिक मंच से सावरकर को भारत रत्न देने की खुलकर वकालत की है। इससे पहले संघ कार्यकर्ताओं और कई राजनीतिक नेताओं द्वारा इस सम्मान की मांग उठती रही है, लेकिन संघ प्रमुख की ओर से इस पर कोई स्पष्ट बयान नहीं आया था। उनके इस वक्तव्य को सावरकर के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी मोहन भागवत ने अपनी बात रखी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता इस तरह से किया गया होगा, जिससे भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों को कोई नुकसान न पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में देशहित सर्वोपरि होना चाहिए और सरकारों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित सुरक्षित रहें।

आरएसएस के संगठनात्मक कामकाज पर बोलते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि संघ के “अच्छे दिन” स्वयंसेवकों की निरंतर मेहनत, अनुशासन और वैचारिक प्रतिबद्धता का परिणाम हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों के समर्पण और सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि संघ की ताकत उसकी जमीनी कार्यशैली और समाज से जुड़ाव में निहित है।

समान नागरिक संहिता (UCC) के मुद्दे पर मोहन भागवत ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि इसे बनाते समय समाज के सभी वर्गों को विश्वास में लेना जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि इस प्रक्रिया से मतभेद या तनाव नहीं बढ़ना चाहिए, बल्कि सामाजिक समरसता और आपसी विश्वास को मजबूत किया जाना चाहिए।

मुंबई में आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम का भी उन्होंने उल्लेख किया। कार्यक्रम के पहले दिन सलमान खान सहित कई मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए, जिसे सामाजिक संवाद के संकेत के रूप में देखा गया। इसी दौरान मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का प्रमुख किसी भी जाति का हो सकता है, इसके लिए किसी विशेष जाति से होना आवश्यक नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भी संघ का प्रमुख बनेगा, उसकी पहचान हिंदू के रूप में होगी, न कि किसी जाति विशेष के आधार पर।

संघ प्रमुख के इन बयानों को सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय हित और वैचारिक स्पष्टता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।